Bhai Manjh Ji Sakhi In Hindi || TRUE STORY OF A SIKH

Bhai Manjh Ji Sakhi In Hindi || TRUE STORY OF A SIKH || बहुत प्र्किषा देनी पड़ी गुरसिखी लेने के लिए। आप दिन भर सेवा करते और रात के समय आराम करते।

Bhai Manjh Ji Sakhi In Hindi

भारत में सबसे ज़्यादा mughal empire रहा और उन्होंने सभ से ज़्यादा राज किया।bhai manjh ji sakhi in hindi उस समय हिन्दू धर्म अपने देवी देवता की पूजा में लगा हुआ था। स्त्रावी सदी में सखी सर्वर का पूजन सब से ज़्यादा था। जैसे हिन्दू लोग माता के मंदिरो में गाते हुए जाते थे वैसे ही मुसलमान भी skhi server ki mzaar peer nigahey जाया करते थे। mughal empire के समय skhi server ki mzaar peer nigahey की पूजा बहुत ज़्यादा बढ़ गई और मुसलमानो के साथ साथ और धर्मो के लोग भी वहां जाने लगे। भगतो की हालत यह बन गई के लोगो ने अपने घरो में ही पीर को स्थापित कर लिया और पूजा करनी शुरू कर दी। पंजाब में इसका बहुत ज़्यादा असर दिखाई देने लगा। ठीक उसी समय sikh धरम की शुरआत हो चुकी थी। अमृतसर उस समय सिखी का केंदर था।

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skhi server ki mzaar peer nigahey की पूजा ने बहुत खतरनाक तरीके से हिन्दू और मुसलमानो को एक करना शुरु कर दिए था। bhai manjh ji दुआबे द रहने वाले थे और मंजकी इलाके से संबंध रखते थे। आप के पहला नाम तीर्थ था। guru arjan dev ji की शरण में ही आप का नाम bhai manjh ji पड़ा था। आप बी बहुत ज़्यादा हद तक skhi server ki mzaar peer nigahey के उपाशक थे। घर में पीर की मज़ार बना रखी थी और लोगो को जादू मंतर के साथ जोड़ते थे। इतना सब करने के बावजजोद भी आप के मन को चैन नहीं था। एक दिन आप भी अपने संगी जनो के साथ skhi server ki mzaar peer nigahey में जा रहे थे। जब अमृतसर के पास से गुज़रे तो आप के कानो में gurubani की आवाज़ पड़ी।

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इतनी मीठी आवाज़ सुन के आप से रहा नहीं गया। और राह से गुज़रते सिख से पूछा की जे तुम क्या गा रहे हो और जे सभ तुमने कहाँ से सीखा। उस sikh ने जवाब दिया की में guru nanak ji की बाणी गा रहा हु। जे सभ सुनकर आप ने भी उसके साथ जाने की इच्छा प्रगट की। वह sikh आप को अमृतसर गुरु दरबार में ले गया। उस समय गुरु घर में कीर्तन हो रहा था। आप के कानो में जब इलाही बाणी पड़ी तो आप के मन में एक अलग हे गहन शांति महसूस की। उसी समय आप ने अपने मन में विचार बना लिया की अब में भी गुरु जी का सिख बनुगा। आप उस रात को वापस अपने साथियो के पास आ गए। दूसरे दिन सुबह जब सभी साथी skhi server ki mzaar peer nigahey की तरफ चलने लगे तो आप उनसे बहाना बनाकर वापस आ गए।

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आप अमृतसर वापस आ गए। कुछ दिन सेवा करने के बाद आप गुरु जी के सामने खड़े होकर सिख बनने की इच्छा प्रगट की। गुरु जी बोले जाओ अपने घर पर जो पीर की मज़ार बना रखी है उसको हटाओ फिर हम तुम्हे अपने पास बुला लेंगे और सिख बना लेंगे। गुरु जी की आज्ञा लेकर आप अपने घर वापस आ गए। आप की पत्नी ने पूछा की skhi server ki mzaar peer nigahey की मज़ार हो आए और इस बार बहुत जल्दी वापस लौट आए। आप ने पत्नी की बातो में ध्यान नहीं दिया। फावड़ा उठा पीर की मज़ार को उखाड़ दिया। जे सब देख बिरादरी वाले आप से बोलने लगे की पीर तुम्हे फना कर देगा पहले हे तुम्हारी संताने मेर चुकी है अब फिर मर जायेगे। जो जिसके मन में आया सब ने बोला। आखिर में बिरदारी ने आप से रिश्ता खतम कर लिया।

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जे सब होने के बाद आप ने अमृतसर वाले गुरु की बात अपनी बीवी को बताई। जे सब करने के बाद आप के दिन खराब चलने लगे क्योंकि सभी साक संबंधी आप का साथ छोड़ गए। आप अपना समय किसी तरह वयतीत करने लगे। अचानक एक दिन आप से मिलने गुरु का सिख आया। और बात करने पे पता चला की वह आप के लिए गुरु का कोई संदेश लेकर आया है। उसने गुरु का संदेश देने से पहले १० रुपये मांग की शर्त रखी। आप ने किसी तरह वह १० रुपये लाकर उस सिख को दे दिए। फिर उस सिख ने गुरु का संदेश सुनाया की bhai manjh ji आप अभी अपने घर पर ही रुको जब हम आप को दुबारा संदेश भेजेंगे तो फिर आना। आप ने गुरु का संदेश लिया और अपने सिर से लगा लिया। मुश्किल से १० -१५ दिन गुज़रे थे की आप को मिलने के लिए एक गुरु का सिख मिलने आया।

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इस बार उस सिख को आप के घर की हालत का पता गायों से ही चल गया था। लेकिन वह भी मज़बूर था गुरु जी ने जो बोला था की १० रुपए लिए बिना संदेश मत देना। वह bhai manjh ji के पास आ गया। और पहले की तरह संदेश देने से पहले १० रुपए की मांग रखी। आप के घर की हालत पहले ही बहुत ज़र्ज़र थी। आप ने सिख को बैठने का बोल के पैसे की इंतजाम करने चले गए। कुछ दिन पहले आप की लड़की की शादी होनें वाली थी। आप उस इंसान के पास गए जो उसकी शादी करवाने वाला था और अपनी बेटी की शादी का बोल कर उससे १० रुपए लेकर उस को दे दिए और उससे संदेश लिया।

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संदेश में लिखा था की bhai manjh ji आप अमृतसर आ जाओ और सेवा करो। आप ने गुरु का संदेश लिया और अमृतसर जा पुहंचे। आप दिन भर सेवा करते और रात के समय आराम करते। खाना पानी आप लंगर में से ही खाते। इस तरह आप को बहुत स प्र्किषा देनी पड़ी गुरसिखी लेने के लिए।

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